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Hindi Shayari in Hindi Font

Aug 31, 2013

खामोश हूँ मगर चेहरोँ की शिकन से वाकिफ हूँ ।
क्या हो रहा है जमाने के चलन से वाकिफ हूँ ।।
ये खूबसूरत फूल भी नर्म मगरबेवफा होते हैँ ।
कोई माने या ना माने मैँ इस चमन से वाकिफ हूँ ।।
मैँने भी सुना है के वफा बडी हशीँ चीज होती है ।
कोई मुझसे भी पूँछे मैँ इसकी चुभन से वाकिफ हूँ।।
मैँ तन्हाँ भी हूँ और सुकूँन-ओ-चैन से महरूम भी।
दिल पर लगी है मैँ इस जलन सेवाकिफ हूँ ।।
उससे टूट कर वफा करता हूँ आज भी मैं ।
वो भी कहे किसी रोज के तेरे पागलपन से वाकिफ हूँ ।।
 

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