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बोहत दिनों बाद कुछ शेर लाया हूँ Bahut Dinno baad kuch Sher Laya hun

Oct 9, 2012


वक्त की राहों में तू भुला दे चाहे हमें, पर हम तुमको भुला ना पाएंगे,
तेरे प्यार की कसम, तू आवाज़ दे सपने में, हम हकीक़त में चले आयेंगे

ज़माने भर की बातों में हमें ना भुला देना, जब कभी याद आए तो ज़रा सा मुस्कुरा देना
जिंदा रहे तो मिलेंगे बार बार नही रहे तो दिल के किसी कूदे में दफन देना

कभी कोई अपना अनजान हो जाता हैं, कभी किसी अनजान से प्यार हो जाता है,
ज़रूरी तो नही जो खुशी दे उसी से प्यार हो, दिल तोड़ने वालो से भी अक्सर प्यार हो जाता है

तुम जब भी चाँद को देखो उस वक्त याद करना मुझे भी,
ये सोच कर नही की खुबसूरत है वो सितारों में , ये सोच कर कर के अकेला है वोह भी हजारों में

दिल की हसरत जुबां पर आने लगी, तुम्हे देखा और ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी,
ये दीवानगी थी या मेरी नज़र का धोखा, हर चीज़ में तेरी सूरत नज़र आने लगी

सिर्फ़ मैं ही थाम सकू हाथ उसका, मुझ पर इतनी इनायत सी कर दे
वो रह न पाये एक पल भी मेरे बिना, ए खुदा तू उस को मेरी आदत सी कर दे

हम
तो प्यार के सौदागर है, सौदा साचा करते है
पर जब आप जैसे डॉस हो खरीदार, तो हम मुफ्त में भी बिक जाया करते है

लोग कहते है की जिस से हम ने दोस्ती की है, वो चाँद का एक टुकडा है
हम कहते है की जिस से हमने दोस्ती की है, चाँद उस का टुकडा है

कांच
को चाहत थी पत्थर पाने की, एक पल में टूट कर बिखर जाने की
चाहत बस इतनी थी उस दीवाने की, अपने हज़ार टुकडो में उसकी हज़ार तस्वीर पाने की

सुकून मिलता है जब उनसे बात होती है, उनसे बात होती है
हज़ार रातों में वोह एक रात होती है, निगाह उठा के वोह देखे कभी जो मेरी तरफ़
वोह एक निगाह मेरी कैनात होती है

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